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फ़ादर्स डे पर मेरे पापा के लिए कुछ शब्द❤️

पिता शब्द में ही सम्पूर्णता है। 
मुझे पता है कोई एक दिन नही बना है अपने पिता को याद करने के लिए और यकीन मानिए कोई ऐसा दिन आज तक हुआ भी नही जो मैने अपने पापा को याद न किया हो। लेकिन आज फादर्स डे पर कुछ लिखना चाहती थी पापा के लिए। 
वैसे तो लिखने को इतना कुछ है कि शायद समय कम पड़ जाए लेकिन शब्द कम नहीं पड़ेंगे।
लेकिन कहते है ना इंसान के जाने के बाद लगता है कि हमने कुछ कहा क्यों नहीं जबकि इतना कुछ था कहने को।
गुणों का भंडार थे पापा। मेहनत क्या होती है कोई सीखे उनसे। एक संकुचित सोच वाले परिवार से होते हुए भी कभी उन्होंने अपनी बेटियों को किसी बंधन में नहीं बंधा। समय के बदलाव के साथ चलने वालों में से थे पापा।
आजकल के पिता जैसे नहीं थे लेकिन कुछ न कहते हुए भी उनके जो कानून बने थे उनका बिना किसी शर्त के पालन भी किया था हमने।
कभी ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे उनकी इज़्जत को नुकसान पहुँचे। मेरे दिल और दिमाग में हमेशा से था ऐसा कोई काम नहीं करना है जिससे पापा की इज़्ज़त पर बात आ जाये।
इज़्ज़त कमाई भी तो बहुत थी उन्होंने। बहुत अच्छा लगता था जब हमको देखकर ही लोग अलग से बर्ताव करते थे। कभी किसी लाइन में खड़ा नही होना पड़ा। कभी किसी डॉक्टर ने फीस नहीं ली और ये कोई डर नहीं था इज़्ज़त थी जो पापा ने कमायी थी।
जिस बैंक में पापा नौकरी करते थे उस बैंक को पापा के नाम से जाना जाता था। हमारी कॉलोनी को पापा के नाम से जाना जाता था।
ये मेरे लिए तो बहुत गर्व की बात थी।
 राजनीति में थे,बहुत ऊंचाइयों पर तो नहीं थे लेकिन कितने ही लोग उनसे मदद के लिए आते थे। और उनका काम करवाते भी थे पापा। बहुत से लोगों को उन्होंने राजनीति में लाया जो आज अच्छे काम कर रहे है।
बहुत से लोग समाज में रहते हुए भी समाजिक नहीं होते। सामाजिक होना भी बड़ी बात है।
मैं यकीन से कह सकती हूँ आज भी बहुत से लोग होंगे  उनकी बातें करते हुए भावुक हो जाते होंगे।

उनकी दोस्ती भी अलग ही थी। ये उनका व्यवहार ही था जो उन्होंने बहुत सारे अच्छे दोस्त बनाये। बेबाक थे तो झगड़े भी बहुत होते थे। बहन भाइयों से हमेशा झगड़ते थे लेकिन उनके बिना रह भी नहीं सकते थे।
उनका हँसना आज भी कानों में गूंजता है। आज भी उनकी आवाज़ याद आती है।
लिखते हुए आंखें नम है क्योंकि याद आ रहा है उनके साथ बिताया समय जो कभी नहीं भुला पाऊंगी मैं।
पिता की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। 
भगवान ने माँ-बाप को बनाया ही इतना महत्वपूर्ण है कि उनकी कमी कभी पूरी हो ही नहीं सकती।
माँ को अकेला देखकर पापा की कमी खलती है।
इतनी बातें करते थे आज घर सुनसान लगता है उनकी आवाज़ के बिना। घर ही क्या कॉलोनी सुनसान लगती है लोग कहते है वहाँ के।
कभी-कभी लगता है क्यों इतनी जल्दी गए पापा। हम सब को ज़रूरत है आपकी।
इतना प्यार दिया बेटियों को जिसकी कोई सीमा नहीं। भाई को डाँटने के बाद रोते थे। ये प्यार ही तो था। 

उनकी सुबह मम्मी के नाम से शुरू होती थी और रात भी मम्मी के नाम से खत्म होती थी। सब कुछ छोड़कर चले गए
माँ औऱ पिता ऐसी धरोहर है जिसको हमेशा सहेजकर रखना चाहिए। उनका साया सिर पर हो तो किसी का डर नहीं किसी की चिंता नहीं। 

लेकिन आज मैं गर्व से कह सकती हूं मैं अंश हूँ उनका मुझमें भी वो निडरता औऱ आत्मविश्वास है जो मेरे पापा में था। 
उनका जैसा स्थान समाज में था वैसा तो नहीं बन पायेगा लेकिन मैं हमेशा कोशिश करूँगी।
अगर हमारे इस दुनिया से जाने के बाद लोग  और हमारे द्वारा किये हुए अच्छे कर्मों को इज़्ज़त से याद करें तो यकीनन हमारा जीवन सफल है।

जैसा मैंने कहा था बताने के लिए इतना कुछ है कि समय कम पड़ जायेगा।
ऐसे थे मेरे पापा।
हमेशा आपकी याद आती है पापाजी। 
हैप्पी फ़ादर्स डे❤️